जींद
शिक्षा विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। विभागीय कर्मचारियों की
लापरवाही के कारण कुछ माह पहले बंद कर दिए गए स्कूलों के नाम भी ग्रांट
जारी कर दी गई है।
शिक्षा विभाग ने कुछ माह पहले प्रदेश के करनाल, यमुनानगर, अंबाला,
फतेहाबाद, जींद, पानीपत, पंचकूला, कैथल, भिवानी, रेवाड़ी व सोनीपत के ऐसे
प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया था, जहां पर छात्र संख्या 25
से कम थी। प्रदेशभर में ऐसे 124 स्कूलों को बंद करके इनके विद्यार्थियों को
पास के स्कूलों में समायोजित किया गया था।
इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने बंद किए गए स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की वर्दी, स्टेशनरी, बैग व अन्य फंड की राशि जारी कर दी है। इन 124 स्कूलों में पहले पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्टेशनरी के 150 रुपये, बैग के 120 रुपये, 18 रुपये फीस व फंड तथा 400 रुपये वर्दी प्रति छात्र के हिसाब से संबंधित एसएमसी व होल्डर के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। अब इन खातों की राशि को विभाग को ट्रांसफर करने के लिए इन स्कूलों में इंचार्ज रहे अध्यापकों को जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हरियाणा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव दीपक गोस्वामी का कहना है कि विभाग के कर्मचारियों को चाहिए कि वे ठीक प्रकार से रिव्यू करके बजट को स्कूलों के खाते में डाले। मौलिक शिक्षा निदेशक डॉ. अभय सिंह यादव ने संपर्क करने पर कहा कि जो स्कूल मर्ज हो चुके हैं, उन्हें ग्रांट जारी नहीं हो सकती। यदि किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत के कारण ऐसा हुआ होगा तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।
इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने बंद किए गए स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की वर्दी, स्टेशनरी, बैग व अन्य फंड की राशि जारी कर दी है। इन 124 स्कूलों में पहले पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्टेशनरी के 150 रुपये, बैग के 120 रुपये, 18 रुपये फीस व फंड तथा 400 रुपये वर्दी प्रति छात्र के हिसाब से संबंधित एसएमसी व होल्डर के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। अब इन खातों की राशि को विभाग को ट्रांसफर करने के लिए इन स्कूलों में इंचार्ज रहे अध्यापकों को जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हरियाणा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव दीपक गोस्वामी का कहना है कि विभाग के कर्मचारियों को चाहिए कि वे ठीक प्रकार से रिव्यू करके बजट को स्कूलों के खाते में डाले। मौलिक शिक्षा निदेशक डॉ. अभय सिंह यादव ने संपर्क करने पर कहा कि जो स्कूल मर्ज हो चुके हैं, उन्हें ग्रांट जारी नहीं हो सकती। यदि किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत के कारण ऐसा हुआ होगा तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।


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